हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: चाईबासा में सजा गौरव का महाकुंभ

दुर्लभ ऐतिहासिक अखबारों की प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र।


मेधावी छात्र-छात्राएं और रक्तदाता सम्मानित, पत्रकारिता के भविष्य पर हुआ गंभीर मंथन।


चाईबासा।हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चाईबासा में एक भव्य एवं ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ से सम्बद्धता प्राप्त झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस समारोह में पत्रकारिता जगत, समाजसेवियों, शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं, विद्यार्थियों और बुद्धिजीवियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।

कार्यक्रम का मुख्य विषय “उदन्त मार्तण्ड से डिजिटल युग तक : हिंदी पत्रकारिता का 200 वर्ष” रहा। कार्यक्रम में हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की गौरवशाली यात्रा को याद करते हुए उसके संघर्ष, विकास, उपलब्धियों और बदलते स्वरूप पर विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर सामाजिक जागरण, लोकतंत्र की मजबूती और जनहित के मुद्दों को आवाज देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।


समारोह का सबसे आकर्षक केंद्र दुर्लभ एवं ऐतिहासिक अखबारों की प्रदर्शनी रही। प्रदर्शनी में स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता प्राप्ति के समय के कई महत्वपूर्ण समाचार पत्रों को प्रदर्शित किया गया, जिन्हें देखकर उपस्थित लोग भावुक और गौरवान्वित नजर आए।


विशेष आकर्षण 15 अगस्त 1947 के समय प्रकाशित ऐतिहासिक अखबार रहा, जिसने आजादी की उस ऐतिहासिक सुबह की यादों को जीवंत कर दिया। इस अनमोल धरोहर को प्रदर्शनी के लिए लेकर आए सरदार गुरमुख सिंह खोखर की पहल की सभी ने सराहना की।
पत्रकारिता के इस उत्सव में समाज और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को भी सम्मानित किया गया।

विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।इसके अलावा, रक्तदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले ‘सिंहभूम ब्लड डोनर ग्रुप’ से जुड़े मो. सैफी को भी विशेष सम्मान देकर उनकी समाजसेवा को सराहा गया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे लोग समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं और युवा पीढ़ी को उनसे सीख लेनी चाहिए।

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