कटरा बाजार, गोंडा। एक ओर प्रदेश और देश भर में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए करोड़ों पौधे लगाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गोंडा जनपद के कौड़ियां बाजार थाना क्षेत्र में प्रतिबंधित हरे पेड़ों की कटान का मामला सामने आने से सरकारी दावों पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग और पुलिस की कथित मिलीभगत के चलते क्षेत्र में खुलेआम हरे पेड़ों पर आरा चलाया जा रहा है। मामला थाना कौड़िया बाजार क्षेत्र की ग्राम पंचायत सिसैया से जुड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार गांव के पश्चिमी किनारे स्थित क्षेत्र में हाल ही में कई हरे और फलदार पेड़ों की कटान की गई है। आरोप है कि यहां चार हरे गूलर के पेड़ तथा चार फलदार फरेंद के पेड़ों को काट दिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि जिन पेड़ों की कटान की गई है, वे वर्षों पुराने थे और स्थानीय पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहां सरकारी विभाग पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हरे-भरे पेड़ों की कटान रोकने में संबंधित विभाग पूरी तरह विफल दिखाई दे रहे हैं।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्र में हरियाली तेजी से समाप्त होती जाएगी और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि बिना विभागीय संरक्षण के इतनी बड़ी संख्या में हरे पेड़ों की कटान संभव नहीं है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि पर्यावरण संरक्षण को लेकर सरकार गंभीर है तो अवैध कटान में शामिल लोगों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। विश्व पर्यावरण दिवस पर एक ओर पौधारोपण और हरियाली बढ़ाने के संकल्प लिए जा रहे हैं,
वहीं दूसरी ओर सिसैया गांव में सामने आया यह मामला पर्यावरण संरक्षण की जमीनी हकीकत पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और अवैध कटान पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
