उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा—महिलाओं को केवल कर्ज नहीं, आमदनी बढ़ाने पर हो जोर
लखनऊ, 9 सितंबर। उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रदेश में तीन करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने और एक करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल कर्ज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनकी आमदनी बढ़ाकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है।

बुधवार को योजना भवन, लखनऊ में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत अनुबंधित तकनीकी सहयोगी संस्थाओं, बैंकरों, दुग्ध उत्पादक कंपनियों एवं एचसीएल संस्था के कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने की। ग्राम्य विकास विभाग की राज्य मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।
महिला उद्यमी योजना को सरल बनाने के निर्देश
उपमुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि एक करोड़ से अधिक महिलाओं को प्रथम किश्त के रूप में 20 हजार रुपये उपलब्ध कराए जाने हैं, जिसका ब्याज विभाग द्वारा वहन किया जाएगा। इसके बाद दूसरी किश्त के रूप में 30 हजार रुपये दिए जाएंगे।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सरल और सुगम बनाई जाए, ताकि उन्हें बैंक और अन्य प्रक्रियाओं में अनावश्यक परेशानी न हो।
गरीब महिलाओं को ऋण देने में सहयोग करें बैंक
बैंकर्स को निर्देश देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराने में सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के ऋण का ब्याज वहन कर रही है, इसलिए पात्र महिलाओं को योजना का लाभ मिलने में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण को केवल एक योजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह गरीब कल्याण की भी महत्वपूर्ण पहल है। महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।
कम लागत में ई-रिक्शा उपलब्ध कराने पर जोर
उपमुख्यमंत्री ने डेवलपमेंट अल्टरनेटिव संस्था को मिशन के अधिकारियों के साथ समन्वय कर दो लाख रुपये तक की कीमत वाले अच्छे ई-रिक्शा चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ऐसे ई-रिक्शा उपलब्ध कराए जाएं, जिनसे उन पर आर्थिक बोझ कम पड़े और कम लागत में अधिक आमदनी हो सके।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने वाली योजनाओं में लागत और आमदनी दोनों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
हर संकुल स्तरीय संघ के पास हो ड्रोन
तकनीक के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाने पर भी बैठक में विशेष जोर दिया गया। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को योजना तैयार करने के निर्देश दिए कि प्रत्येक संकुल स्तरीय संघ के पास कम से कम एक ड्रोन उपलब्ध हो।
उन्होंने कहा कि ड्रोन के माध्यम से कृषि और अन्य गतिविधियों में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाया जा सकता है। इससे महिलाओं के लिए आय के नए अवसर भी पैदा होंगे।
बीमा क्लेम के लिए गरीब परिवारों को न लगाना पड़े चक्कर
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ऋण उपलब्ध कराते समय बैंकों द्वारा बीमा तो कर दिया जाता है, लेकिन बीमा क्लेम के समय गरीब परिवारों और आश्रितों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यह स्थिति उचित नहीं है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बीमा क्लेम के मामलों का संवेदनशील, शालीन और समयबद्ध तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही गरीब महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या छल न हो, इसके लिए अधिकारी लगातार निगरानी रखें।
पशुपालन से महिलाओं की आय बढ़ाने पर जोर
उपमुख्यमंत्री ने महिलाओं को गाय और भैंस खरीदने के लिए सरल एवं सुगम तरीके से ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन के माध्यम से महिलाएं अपनी आय बढ़ा सकती हैं और इससे प्रदेश में एक करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य को भी गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से उनका सम्मान बढ़ेगा। साथ ही परिवार और बच्चों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
पांच मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां कर रहीं काम
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में पांच मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इनके माध्यम से महिला दुग्ध उत्पादकों को संगठित किया जा रहा है और उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री ने इन प्रयासों को और प्रभावी बनाने तथा अधिक से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ने पर जोर दिया।
योजनाओं की जानकारी पात्र महिलाओं तक पहुंचाने के निर्देश
श्री मौर्य ने बैंकर्स और अधिकारियों को सरकार की विभिन्न योजनाओं के संबंध में जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र महिलाओं तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाना और उन्हें समय से लाभ दिलाना सभी संबंधित विभागों एवं संस्थाओं की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो, यह सुनिश्चित किया जाए।
एचसीएल के कार्यों की भी समीक्षा
बैठक के प्रारंभ में एचसीएल संस्था की ओर से प्रदेश में किए जा रहे कार्यों एवं उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। संस्था की ओर से स्मार्ट स्कूल, स्वास्थ्य एवं समुदाय आधारित जागरूकता सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि एचसीएल अपने अधिकांश सीएसआर फंड का उपयोग उत्तर प्रदेश में कर रही है और वर्तमान में 13 जनपदों में कार्यरत है। उपमुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि किसी भी जनपद के संतृप्त होने तक वहां कार्य निरंतर जारी रखा जाए, ताकि संचालित कार्यक्रमों का अधिक से अधिक लोगों को स्थायी लाभ मिल सके।
अधिकारियों और सहयोगी संस्थाओं ने रखीं उपलब्धियां
बैठक में विभिन्न सहयोगी संस्थाओं ने अपने-अपने कार्यों एवं उपलब्धियों की जानकारी साझा की। महिला स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमियों और दुग्ध उत्पादक महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों से भी उपमुख्यमंत्री को अवगत कराया गया।
बैठक में प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू, आयुक्त ग्राम्य विकास प्रमोद कुमार उपाध्याय, मिशन निदेशक राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अरुण कुमार, अपर मिशन निदेशक जयनाथ यादव, संयुक्त मिशन निदेशक प्रवीणानन्द, चंद्रशेखर और देवेंद्र कुमार ओझा सहित विभिन्न बैंकों, तकनीकी सहयोगी संस्थाओं के प्रमुख और मिशन के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
