
नहर में पानी न होने से डीजल इंजन के सहारे सिंचाई, किसानों की बढ़ी लागत
संतकबीरनगर। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही सांथा विकास खंड से होकर गुजरने वाली सरयू नहर सूखी पड़ी है। नहर में पानी नहीं होने से धान की नर्सरी तैयार करने और सब्जी की खेती करने वाले किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। मजबूरी में किसान निजी पंपिंग सेट और डीजल इंजन के सहारे खेतों की सिंचाई कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत में काफी बढ़ोतरी हो रही है।
किसानों का कहना है कि वर्तमान समय धान की नर्सरी तैयार करने और खरीफ फसलों की बुवाई का सबसे महत्वपूर्ण दौर है। ऐसे समय में नहर में पानी न मिलने से फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। डीजल के बढ़ते दाम के कारण पंपिंग सेट चलाना भी महंगा पड़ रहा है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार सरयू नहर सिद्धार्थनगर जनपद में राप्ती नदी से निकलकर धर्मसिंहवा, राजेडीहा, निघुरी, सांथा, नंदौर सहित दर्जनों गांवों से होकर गुजरती है। नहर में नियमित पानी रहने से हजारों किसानों के खेतों की सिंचाई होती है और खेती का काम सुचारु रूप से चलता है। लेकिन इस समय नहर पूरी तरह सूखी होने से किसान वैकल्पिक साधनों पर निर्भर हैं।किसानों ने बताया कि यदि जल्द नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो धान की नर्सरी और अन्य खरीफ फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे उत्पादन प्रभावित होने के साथ किसानों की आय पर भी असर पड़ेगा।
ग्रामीणों और किसानों ने सिंचाई विभाग एवं प्रशासन से तत्काल सरयू नहर में पानी छोड़े जाने की मांग की है, ताकि समय पर सिंचाई हो सके और किसानों को महंगे डीजल के सहारे खेती करने की मजबूरी से राहत मिल सके।

