रांची, 13 जून। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने एचईसी (हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन) की बदहाल स्थिति को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एचईसी के पुनरुद्धार के नाम पर गठित संसदीय समिति की सिफारिशों को लागू नहीं कर केंद्र सरकार ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। समिति का गठन केवल दिखावा साबित हुआ और भाजपा सरकार ने एचईसी को मरने के लिए छोड़ दिया।
शनिवार को जारी बयान में नायक ने कहा कि केंद्र सरकार देश और झारखंड की जनता को बताए कि एचईसी को बचाने के लिए गठित संसदीय समिति की रिपोर्ट का क्या हुआ। यदि समिति की सिफारिशों को लागू ही नहीं करना था तो करोड़ों रुपये खर्च कर समिति बनाने का नाटक क्यों किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह केवल एचईसी कर्मियों और झारखंड की जनता को गुमराह करने का राजनीतिक प्रपंच था।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले बारह वर्षों में एचईसी को पुनर्जीवित करने के नाम पर केवल झूठे आश्वासन दिए हैं। आज स्थिति यह है कि कभी देश की औद्योगिक ताकत का प्रतीक रहा एचईसी वेतन संकट, उत्पादन संकट और अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों का भविष्य अंधकार में धकेल दिया गया है, लेकिन दिल्ली की भाजपा सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।
विजय शंकर नायक ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीति शुरू से ही सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कमजोर करने और उन्हें धीरे-धीरे समाप्त करने की रही है। एचईसी के मामले में भी यही रणनीति अपनाई गई। पहले संस्थान को आर्थिक रूप से कमजोर किया गया, फिर उसे पर्याप्त कार्यादेश नहीं दिए गए, कर्मचारियों को वेतन के लिए तरसाया गया और अब पुनरुद्धार की बातें केवल भाषणों और घोषणाओं तक सीमित कर दी गई हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार एक ओर “मेक इन इंडिया”, “आत्मनिर्भर भारत” और “विकसित भारत” जैसे बड़े-बड़े नारे लगाती है, वहीं दूसरी ओर देश की भारी इंजीनियरिंग क्षमता की रीढ़ माने जाने वाले एचईसी को बचाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं करती। यह सरकार उद्योगों को बचाने के बजाय केवल विज्ञापन और प्रचार पर विश्वास करती है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि झारखंड की जनता यह जानना चाहती है कि यदि संसदीय समिति ने एचईसी को बचाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे तो उन्हें लागू करने से भाजपा सरकार को किसने रोका। क्या केंद्र सरकार एचईसी को जानबूझकर कमजोर कर रही है? क्या सार्वजनिक क्षेत्र के इस ऐतिहासिक संस्थान को समाप्त करने की कोई सुनियोजित रणनीति चल रही है? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब देश और प्रदेश की जनता मांग रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को झारखंड आकर बड़ी-बड़ी बातें करने से पहले एचईसी कर्मियों की आंखों में आंख डालकर बताना चाहिए कि उनकी सरकार ने संस्थान को बचाने के लिए आखिर किया क्या है। केवल फोटो खिंचवाने, घोषणाएं करने और वादे करने से उद्योग नहीं चलते।
विजय शंकर नायक ने केंद्र सरकार से मांग की कि संसदीय समिति की सभी प्रमुख सिफारिशों को तत्काल सार्वजनिक किया जाए, उनके क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट की जाए, एचईसी के लिए विशेष पुनरुद्धार पैकेज घोषित किया जाए, कर्मचारियों के लंबित वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा संस्थान को पर्याप्त कार्यादेश देकर पुनः उत्पादन शुरू कराया जाए।
उन्होंने कहा कि एचईसी की वर्तमान दुर्दशा भाजपा सरकार की औद्योगिक नीतियों की विफलता का जीवंत प्रमाण है। झारखंड की जनता और एचईसी कर्मी अब आश्वासन नहीं, बल्कि जवाब और हिसाब मांग रहे हैं। केंद्र सरकार को बताना होगा कि उसने एचईसी को बचाने के बजाय बर्बादी की ओर क्यों धकेला।
